श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 4: व्याभिचारी-भाव (क्षणिक आनंदवर्धक अस्थिरताएँ)  »  श्लोक 241
 
 
श्लोक  2.4.241 
एकेन जायमानानाम् अनेकेन च हेतुना ।
बहूनाम् अपि भावानां सन्धिः स्फुटम् अवेक्ष्यते ॥२.४.२४१॥
 
 
अनुवाद
“यह भी देखा गया है कि एक कारण या अनेक कारणों से उत्पन्न होकर अनेक भाव एक साथ जुड़ सकते हैं।”
 
“It has also been observed that many emotions can arise from one or more causes and come together.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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