श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 4: व्याभिचारी-भाव (क्षणिक आनंदवर्धक अस्थिरताएँ)  »  श्लोक 238
 
 
श्लोक  2.4.238 
अथ भिन्नयोः —
भिन्नयोर् हेतुनैकेन भिन्नेनाप्य् उपजातयोः ॥२.४.२३८॥
 
 
अनुवाद
“जब एक ही या भिन्न कारणों से उत्पन्न दो भिन्न व्यवहारिक भाव एक साथ जुड़ते हैं तो उसे भिन्न भाव संधि कहते हैं।”
 
“When two different practical expressions arising from the same or different causes join together, it is called different feeling combination.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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