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श्लोक 2.4.209  |
यथा —
तनुरुहाली च तनुश् च नृत्यं तनोति मे नाम निशम्य यस्य ।
अपश्यतो माथुर-मण्डलं तद्-व्यर्थेन किं हन्त दृशोर् द्वयेन ॥२.४.२०९॥ |
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| अनुवाद |
| उदाहरण: “उन आँखों का क्या उपयोग है जो मथुरा को नहीं देखतीं, जिसका नाम सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं?” |
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| Example: “What is the use of eyes that do not see Mathura, whose name gives me goosebumps?” |
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