श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 4: व्याभिचारी-भाव (क्षणिक आनंदवर्धक अस्थिरताएँ)  »  श्लोक 209
 
 
श्लोक  2.4.209 
यथा —
तनुरुहाली च तनुश् च नृत्यं तनोति मे नाम निशम्य यस्य ।
अपश्यतो माथुर-मण्डलं तद्-व्यर्थेन किं हन्त दृशोर् द्वयेन ॥२.४.२०९॥
 
 
अनुवाद
उदाहरण: “उन आँखों का क्या उपयोग है जो मथुरा को नहीं देखतीं, जिसका नाम सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं?”
 
Example: “What is the use of eyes that do not see Mathura, whose name gives me goosebumps?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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