श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 4: व्याभिचारी-भाव (क्षणिक आनंदवर्धक अस्थिरताएँ)  »  श्लोक 200
 
 
श्लोक  2.4.200 
निन्दायास् तु विभावत्वं वैवर्ण्यामर्षयोर् मतम् ।
असूयायां पुनस् तस्याः कथितैवानुभावता ॥२.४.२००॥
 
 
अनुवाद
“आलोचना या अन्य कार्यों को रंग परिवर्तन (सात्त्विक भाव) और अमर्ष (क्रोध, व्यवहारिक भाव) तथा असूया (ईर्ष्या, व्यवहारिक भाव) का कारण माना जाता है।”
 
“Criticism or other actions are considered to cause colour change (sattvic feeling) and amarsha (anger, behavioral feeling) and asuya (jealousy, behavioral feeling).”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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