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श्लोक 2.4.196  |
एषां सञ्चारि-भावानां मध्ये कश्चन कस्यचित् ।
विभावश् चानुभावश् च भवेद् एव परस्परम् ॥२.४.१९६॥ |
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| अनुवाद |
| “व्यवहारिक भावों में कुछ कारण (विभाव) के रूप में कार्य करते हैं और कुछ प्रभाव (अनुभाव) के रूप में।” |
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| “Among the practical expressions some act as causes (vibhavas) and some as effects (anubhavas).” |
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