श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 4: व्याभिचारी-भाव (क्षणिक आनंदवर्धक अस्थिरताएँ)  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  2.4.140 
अथ (२३) मतिः —
शास्त्रादीनां विचारोत्थम् अर्थ-निर्धारणं मतिः ॥२.४.१४०॥
 
 
अनुवाद
“शास्त्र से परामर्श करके अर्थ निकालना मति कहलाता है।”
 
“Consulting the scriptures and deriving meaning is called Mati.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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