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श्लोक 2.3.91  |
प्रकृत्या शिथिलं येषां मनः पिच्छिलम् एव वा ।
तेष्व् एव सात्त्विकाभासः प्रायः संसदि जायते ॥२.३.९१॥ |
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| अनुवाद |
| "जिनका मन कोमल या कठोर होता है, वे सामान्यतः केवल भगवान के पवित्र नामों के कीर्तन के उत्सव समारोहों में ही सात्विकाभास प्रदर्शित करते हैं।" |
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| "Those who have a soft or hard mind generally display sattvicābhāsa only in the festive ceremonies of chanting the holy names of the Lord." |
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