अथ उद्दीप्ताः —
एकदा व्यक्तिम् आपन्नाः पञ्च-षाः सर्व एव वा ।
आरूढा परमोत्कर्षम् उद्दीप्ता इति कीर्तिताः ॥२.३.७९॥
अनुवाद
बहुत ही शानदार सात्विक भाव: "जब पाँच, छह या सभी सात्विक भाव एक ही समय में, अपने सबसे चरम रूप में प्रकट होते हैं, तो इसे उद्दीप्ता-सात्त्विक भाव कहा जाता है।"
Awesome Sattvic Bhaav: "When five, six or all the Sattvic Bhaavs appear at the same time, in their most extreme form, it is called Uddipta-Sattvic Bhaav."