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श्लोक 2.3.73  |
अथ ज्वलिताः —
ते द्वौ त्रयो वा युगपद् यान्तः सुप्रकटां दशाम् ।
शक्याः कृच्छ्रेण निह्नोतुं ज्वलिता इति कीर्तिताः ॥२.३.७३॥ |
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| अनुवाद |
| ज्योतिर्मय सात्विक भाव: "जब दो या तीन सात्विक भाव बहुत स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं और उन्हें कठिनाई से ही छिपाया जा सकता है, तो उन्हें ज्वलित सात्विक भाव कहा जाता है।" |
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| Jwalit Satvik Bhavas: "When two or three Satvik Bhavas appear very clearly and can be hidden only with difficulty, they are called Jwalit Satvik Bhavas." |
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