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श्लोक 2.3.7  |
अथ गौणाः —
रत्याक्रमणतः प्रोक्ता गौणास् ते गौण-भूतया ।
अत्र कृष्णस्य सम्बन्धः स्यात् किञ्चिद् व्यवधानतः ॥२.३.७॥ |
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| अनुवाद |
| द्वितीयक स्निग्ध-सात्विक-भाव: "द्वितीयक रति से उत्पन्न होने वाले सात्विक-भावों को द्वितीयक स्निग्ध-सात्त्विक-भाव कहा जाता है। कृष्ण के साथ संबंध कुछ हद तक अप्रत्यक्ष है। |
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| Secondary Snigdha-Satvika-Bhava: "The Satvik-Bhava arising from secondary Rati is called secondary Snigdha-Satvika-Bhava. The connection with Krishna is somewhat indirect. |
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