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श्लोक 2.3.56  |
यथा वा —
भीमस्य चेदीश-वधं विधित्सो रेजे’श्रु-विस्रावि रुषोपरक्तम् ।
उद्यन्-मुखं वारि-कणावकीर्णं सान्ध्य-त्विषा ग्रस्तम् इवेन्दु-बिम्बम् ॥२.३.५६॥ |
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| अनुवाद |
| एक और उदाहरण: "जब भीम ने शिशुपाल को मारना चाहा, तो उनका चेहरा लाल हो गया और क्रोध के आँसुओं से भर गया। ऐसा लग रहा था जैसे उगता हुआ पूर्णिमा का चाँद पानी की बूंदों से ढका हो और सूर्यास्त में लालिमा लिए हुए हो।" |
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| Another example: "When Bhima wanted to kill Shishupala, his face turned red and filled with tears of anger. It looked as if the rising full moon was covered with water droplets and was reddened at sunset." |
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