श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 3: सात्त्विक-भाव (अस्वेच्छित आनंदवर्धक अभिव्यंजनाएँ)  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.3.16 
ते स्तम्भ-स्वेद-रोमाञ्चाः स्वर-भेदो’थ वेपथुः ।
वैवर्ण्यम् अश्रु प्रलय इत्य् अष्टौ सात्त्विकाः स्मृताः ॥२.३.१६॥
 
 
अनुवाद
"आठ सात्विक भाव हैं - पक्षाघात, पसीना आना, खड़े हो जाना, आवाज का रुक जाना, कम्पन, रंग बदलना, आंसू आना और बेहोशी।"
 
"The eight sattvic emotions are paralysis, sweating, standing up, loss of voice, trembling, change of colour, tears and fainting."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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