| श्री भक्ति रसामृत सिंधु » सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस » लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ) » श्लोक 65 |
|
| | | | श्लोक 2.1.65  | (७) विविधाद्भुत-भाषावित् —
विविधाद्भुत-भाषावित् स प्रोक्तो यस् तु कोविदः ।
नाना-देश्यासु भाषासु संस्कृते प्राकृतेषु च ॥२.१.६५॥॥ | | | | | | अनुवाद | | (7) विविधाद्भूत-भाषावित्: अद्भुत भाषाविद् - "जो व्यक्ति विभिन्न देशों की भाषाओं, संस्कृत, लोकभाषा और पशुओं की भाषाओं को जानता है, उसे अद्भुत भाषाविद् कहा जाता है।" | | | | (7) Vividhadbhuta-bhashavit: Wonderful linguist - "A person who knows the languages of different countries, Sanskrit, folk languages and animal languages is called a wonderful linguist." | | ✨ ai-generated | | |
|
|