श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.1.56 
तत्र धाम —
दीप्ति-राशिर् भवेद् धाम ॥२.१.५६॥
 
 
अनुवाद
“धाम का तात्पर्य तेजस्विता से है।”
 
“Dham means brilliance.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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