श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  2.1.55 
(४) तेजसा युक्तः तेजो धाम प्रभावश् चेत्य् उच्यते द्विविधं बुधैः ॥२.१.५५॥
 
 
अनुवाद
“बुद्धिमान लोग कहते हैं कि तेजस के दो अर्थ हैं: धाम (तेज) और प्रभाव (शत्रु पर विजय)।”
 
“Wise men say that Tejas has two meanings: Dham (brilliance) and Prabhava (victory over the enemy).”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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