श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 340
 
 
श्लोक  2.1.340 
अथ मृदुता —
मृदुता कोमलस्यापि संस्पर्शासहतोच्यते ॥२.१.३४०॥
 
 
अनुवाद
"कोमलता का अर्थ है इतना कोमल होना कि कोमल वस्तु को छूना भी असहनीय हो जाए।"
 
"Tenderness means being so soft that even touching the soft object becomes unbearable."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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