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श्लोक 2.1.305  |
गुणाः स्वरूपम् एवास्य कायिकाद्या यदप्य् अमी ।
भेदं स्वीकृत्य वर्ण्यन्ते तथाप्य् उद्दीपना इति ॥२.१.३०५॥ |
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| अनुवाद |
| यद्यपि ये शारीरिक गुण कृष्ण के स्वरूप में सम्मिलित हैं, तथापि इन्हें स्वरूप से पृथक मानकर इन्हें उद्दीपन कहा जाता है। |
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| Although these bodily qualities are included in the form of Krishna, they are considered separate from the form and are called stimuli. |
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