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श्लोक 2.1.269  |
औदार्यम् —
आत्माद्य्-अर्पण-कारित्वम् औदार्यम् इति कीर्त्यते ॥२.१.२६९॥ |
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| अनुवाद |
| “उदारता को दूसरे व्यक्ति को अपनी आत्मा तक देने की इच्छा के रूप में महिमा दी जाती है।” |
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| “Generosity is glorified as the willingness to give even one’s soul to another person.” |
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