श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.1.26 
स्थिरो दान्तः क्षमा-शीलो गम्भीरो धृतिमान् समः ।
वदान्यो धार्मिकः शूरः करुणो मान्य-मानकृत् ॥२.१.२६॥
 
 
अनुवाद
"वह दृढ़, धैर्यवान, सहनशील, गूढ़, दृढ़, एकनिष्ठ, उदार, गुणवान, वीर, दयालु और सम्मान के योग्य व्यक्तियों का सम्मान करने वाला है।"
 
"He is firm, patient, tolerant, profound, determined, single-minded, generous, virtuous, heroic, kind and respectful of those who deserve respect."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd