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श्लोक 259
श्लोक
2.1.259
माङ्गल्यम् —
माङ्गल्यं जगताम् एव विश्वासास्पदता मता ॥२.१.२५९॥
अनुवाद
“सम्पूर्ण विश्व के लिए श्रद्धा का विषय होना ही मंगलमय होना कहलाता है।”
“To be an object of reverence for the entire world is called being auspicious.”
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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