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श्लोक 257
श्लोक
2.1.257
माधुर्यम् —
तन् माधुर्यं भवेद् यत्र चेष्टादेः स्पृहणीयता ॥२.१.२५७॥
अनुवाद
“जब कर्मों के माध्यम से इच्छा की अभिव्यक्ति होती है तो उसे माधुर्य कहा जाता है।”
“When desire is expressed through actions, it is called sweetness.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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