श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.1.24 
विविधाद्भुत-भाषा-वित् सत्य-वाक्यः प्रियं वदः ।
वावदूकः सुपाण्डित्यो बुद्धिमान् प्रतिभान्वितः ॥२.१.२४॥
 
 
अनुवाद
"वह आश्चर्यजनक रूप से विविध भाषाएं जानता है, सच्चा है, मधुर भाषा बोलता है, वाक्पटु है, विद्वान है, बुद्धिमान है और नये विचारों से परिपूर्ण है।"
 
"He knows a wonderful variety of languages, is truthful, speaks sweetly, is eloquent, learned, intelligent and full of new ideas."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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