vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री भक्ति रसामृत सिंधु
»
सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस
»
लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)
»
श्लोक 235
श्लोक
2.1.235
युधिष्ठिरादिको धीरैर् धीर-शान्तः प्रकीर्तितः ॥२.१.२३५॥
अनुवाद
“विद्वान लोग युधिष्ठिर तथा अन्य लोगों को धीर-शांत कहकर महिमामंडित करते हैं।”
“The learned glorify Yudhishthira and others by calling them patient and calm.”
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd