श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 233
 
 
श्लोक  2.1.233 
धीर-शान्तः —
शम-प्रकृतिकः क्लेश-सहनश् च विवेचकः ।
विनयादि-गुणोपेतो धीर-शान्त उदीर्यते ॥२.१.२३३॥
धीर-शान्त: गेन्त्ले —
 
 
अनुवाद
"विद्वान कहते हैं कि जो शांत है, कष्ट सहन करता है, विवेक का प्रयोग करता है और विनय जैसे गुणों से युक्त है, उसे धीर-शांत कहा जाता है।"
 
"The learned say that one who is calm, endures hardship, exercises discretion and is endowed with qualities like modesty, is called patient and calm."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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