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श्लोक 2.1.180  |
(५१) अथ सदा-स्वरूप-सम्प्राप्तः —
सदा-स्वरूप-सम्प्राप्तो माया-कार्य-वशीकृतः ॥२.१.१८०॥॥ |
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| अनुवाद |
| (51) अथ सदा-स्वरूप-सम्प्रप्तः नित्य रूप - "जो माया या उसके प्रभावों से नियंत्रित नहीं है, उसे नित्य रूप वाला कहा जाता है।" |
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| (51) Atha sada-svarupa-sampraptaḥ nitya rūpa - "He who is not controlled by Maya or its effects is said to have an eternal form." |
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