श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 143
 
 
श्लोक  2.1.143 
(३७) शरणागत-पालकः —
पालयन् शरणापन्नान् शरणागत-पालकः ॥२.१.१४३॥॥
 
 
अनुवाद
(37) शरणागतपालक: शरणागतों का रक्षक - "जो शरणागतों की रक्षा करता है, उसे शरणागतों का रक्षक कहा जाता है।"
 
(37) Sharanagatpalaka: Protector of the refugees – “He who protects the refugees is called the protector of the refugees.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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