श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  2.1.137 
(३४) दक्षिणः —
सौशील्य-सौम्य-चरितो दक्षिणः कीर्त्यते बुधैः ॥२.१.१३७॥॥
 
 
अनुवाद
(34) दक्षिणाः आज्ञाकारी - "जो व्यक्ति अपने उत्तम स्वभाव के कारण सौम्य है, उसे बुद्धिमान लोग आज्ञाकारी कहते हैं।"
 
(34) Dakshina: Obedient - "The person who is gentle because of his good nature is called obedient by wise people."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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