प्रेम्ण एव विलासत्वाद् वैरल्यात् साधकेष्व् अपि ।
अत्र स्नेहादयो भेदा विविच्य न हि शंसिताः ॥१.४.१९॥
अनुवाद
"स्नेह और अन्य उन्नत अवस्थाएं प्रेम की अभिव्यक्तियां हैं, लेकिन क्योंकि वे दुर्लभ हैं, यहां तक कि उन लोगों में भी जिन्होंने भक्ति का अभ्यास किया है, यहां उनके भेदों का वर्णन नहीं किया जाएगा।"
"Affection and other elevated states are manifestations of love, but because they are rare, even among those who have practiced devotion, their distinctions will not be described here."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥