श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार  »  लहर 4: प्रेम-भक्ति (भगवान के प्रेम में भक्ति)  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.4.14 
महिम-ज्ञान-युक्तः स्याद् विधि-मार्गानुसारिणाम् ।
रागानुगाश्रितानां तु प्रायशः केवलो भवेत् ॥१.४.१४॥
 
 
अनुवाद
"जो लोग वैध-भक्ति का अभ्यास करते हैं और फिर भगवान की महान कृपा प्राप्त करते हैं, वे भगवान की शक्तियों के ज्ञान के साथ प्रेम प्राप्त करते हैं। जो लोग रागानुगा-भक्ति का अभ्यास करते हैं और फिर भगवान की महान कृपा प्राप्त करते हैं, वे आमतौर पर मधुरता के साथ प्रेम प्राप्त करते हैं।"
 
"Those who practice vaidhi-bhakti and then receive the Lord's great grace usually attain love with the knowledge of the Lord's powers. Those who practice raganuga-bhakti and then receive the Lord's great grace usually attain love with sweetness."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)