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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार
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लहर 4: प्रेम-भक्ति (भगवान के प्रेम में भक्ति)
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श्लोक 11
श्लोक
1.4.11
माहात्म्य-ज्ञान-युक्तश् च केवलश् चेति स द्विधा ॥१.४.११॥
अनुवाद
भगवान की कृपा से उत्पन्न प्रेम दो प्रकार का होता है: भगवान की शक्तियों के ज्ञान से युक्त प्रेम, और केवल भगवान की मधुरता के ज्ञान से युक्त प्रेम।
Love born of God's grace is of two kinds: love imbued with the knowledge of God's powers, and love imbued with the knowledge of God's sweetness alone.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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