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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार
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लहर 3: भाव-भक्ति (उत्कट समाधि में भक्ति)
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श्लोक 27
श्लोक
1.3.27
तत्र क्षान्तिः —
क्षोभ-हेताव् अपि प्राप्ते क्षान्तिर् अक्षुभितात्मता ॥१.३.२७॥
अनुवाद
"सहिष्णुता की परिभाषा इस प्रकार है: अविचलित रहना, तब भी जब व्यवधान का कारण हो।"
“The definition of tolerance is this: to remain undisturbed, even when causing disruption.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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