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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार
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लहर 3: भाव-भक्ति (उत्कट समाधि में भक्ति)
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श्लोक 19
श्लोक
1.3.19
हार्दः —
प्रसाद आन्तरो यः स्यात् स हार्द इति कथ्यते ॥१.३.१९ ॥
अनुवाद
“हरदम की परिभाषा दी गई है: भीतर से उत्पन्न होने वाली दया को हरदम कहा जाता है।”
“Hardam is defined as: Kindness that arises from within is called Hardam.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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