नारदीय पुराण में मौखिक दया का वर्णन इस प्रकार है: "हे ब्राह्मणश्रेष्ठ, मुझमें आपकी अनन्य भक्ति हो। वह भक्ति समस्त मंगलों का शिखर है और शाश्वत आनंद से परिपूर्ण है।"
The Naradiya Purana describes verbal mercy as follows: "O best of Brahmins, have exclusive devotion for me. That devotion is the pinnacle of all auspiciousness and is full of eternal bliss."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥