श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार  »  लहर 3: भाव-भक्ति (उत्कट समाधि में भक्ति)  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.3.14 
द्वितीयो, यथा पाद्मे —
इत्थं मनोरथं बाला कुर्वती नृत्य उत्सुका ।
हरि-प्रीत्या च तां सर्वां रात्रिम् एवात्यवाहयत् ॥१.३.१४ ॥
 
 
अनुवाद
पद्म पुराण में रागानुग-साधना से उत्पन्न भाव का वर्णन इस प्रकार किया गया है: "एक युवा लड़की, जिसके हृदय में अत्यधिक आनंद था और जो नृत्य करने के लिए बहुत उत्साहित थी, भगवान को प्रसन्न करने के लिए पूरी रात नृत्य करती रही।"
 
The feeling generated by raganuga-sadhana is described in the Padma Purana as follows: "A young girl, with great joy in her heart and very excited to dance, danced the whole night to please the Lord."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)