श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार  »  लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.2.69 
श्री-भगवद्-गीतासु (१८.६६) —
सर्व-धर्मन् परित्याज्य माम् एकं शरणं व्रज ।
अहं त्वां सर्व-पापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा सुचः ॥१.२.६९॥
 
 
अनुवाद
भगवद्गीता [18.66] में कृष्ण कहते हैं: "सभी प्रकार के धर्मों को त्याग दो और केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्ति दिलाऊँगा। डरो मत।"
 
In the Bhagavad Gita [18.66] Krishna says: "Abandon all kinds of religions and take refuge in Me alone. I will liberate you from all sins. Do not be afraid."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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