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श्लोक 1.2.284  |
इयं तु व्रज-देवीषु सुप्रसिद्धा विराजते ।
आसां प्रेम-विशेषो’यं प्राप्तः काम् अपि माधुरीं ।
तत्-तत्-क्रीडा-निदानत्वात् काम इत्य् उच्यते बुधैः ॥१.२.२८४ ॥ |
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| अनुवाद |
| "यह अत्यंत प्रसिद्ध कामरूप-भक्ति व्रज की स्त्रियों में प्रखरता से प्रकट होती है। उनमें एक विशेष प्रकार का प्रेम होता है जिसमें एक विशेष मधुरता होती है। बुद्धिमान लोग इसे काम कहते हैं क्योंकि यह विभिन्न कामुक क्रियाओं का कारण है।" |
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| "This very famous Kamarupa-bhakti is manifested most intensely among the women of Vraja. They have a special kind of love which has a special sweetness. Wise people call it Kama because it is the cause of various erotic acts." |
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