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श्लोक 1.2.269  |
शास्त्रोक्तया प्रबलया तत्-तन्-मर्यादयान्विता ।
वैधि भक्तिर् इयं कैश्चन् मर्यादा-मार्ग उच्यते ॥१.२.२६९ ॥ |
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| अनुवाद |
| "कुछ लोग वैध-भक्ति को नियमों का मार्ग (मर्यादा-मार्ग) कहते हैं क्योंकि यह शास्त्रों में वर्णित नियमों की मजबूत सीमा से बंधा हुआ है।" |
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| "Some people call Vaidya-bhakti the path of rules (maryada-marga) because it is bound by the strong limits of rules described in the scriptures." |
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