श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार  »  लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  1.2.170 
४३ - अथ श्रवणम् श्रवणं
नाम-चरित-गुणादीनां श्रुतिर् भवेत् ॥१.२.१७०॥
 
 
अनुवाद
“अगला, श्रवण: श्रवण का अर्थ है भगवान के पवित्र नाम, लीलाओं और गुणों को सुनना।”
 
“Next, Shravan: Shravan means listening to the holy name, pastimes and qualities of the Lord.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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