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bhagavat 9.8.27: हे राजा परीक्षित, जब अंशुमान ने इस प्रकार भगवान के गुणों का महिमागान किया तब महामुनि कपिल, जो भगवान विष्णु के शक्तिशाली अवतार हैं, उस पर प्रसन्न हुए और उसे ज्ञान का मार्ग दिखाया।   |   bhagavat अध्याय 9.8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  9.8.27 
श्रीशुक उवाच
इत्थंगीतानुभावस्तं भगवान्कपिलो मुनि: ।
अंशुमन्तमुवाचेदमनुग्राह्य धिया नृप ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजा परीक्षित, जब अंशुमान ने इस प्रकार भगवान के गुणों का महिमागान किया तब महामुनि कपिल, जो भगवान विष्णु के शक्तिशाली अवतार हैं, उस पर प्रसन्न हुए और उसे ज्ञान का मार्ग दिखाया।
 
O King Parikshit, when Anshuman thus glorified the Lord, the great sage Kapil, who is the powerful incarnation of Vishnu, took pity on him and showed him the path of knowledge.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)