Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.8.2: विजय के पुत्र भारुक हुए, भारुक के पुत्र वृक और उनके पुत्र बाहुक हुए। राजा बाहुक के शत्रुओं ने उससे सारा राज पाट छीन लिया, जिसके कारण उसने वानप्रस्थ आश्रम का मार्ग अपनाया और अपनी पत्नी के साथ वन को चला गया। | bhagavat अध्याय 9.8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरुकस्तत्सुतस्तस्माद् वृकस्तस्यापि बाहुक: ।
सोऽरिभिर्हृतभू राजा सभार्यो वनमाविशत् ॥ २ ॥
अनुवाद
विजय के पुत्र भारुक हुए, भारुक के पुत्र वृक और उनके पुत्र बाहुक हुए। राजा बाहुक के शत्रुओं ने उससे सारा राज पाट छीन लिया, जिसके कारण उसने वानप्रस्थ आश्रम का मार्ग अपनाया और अपनी पत्नी के साथ वन को चला गया।
Vijay's son was Bharuk, Bharuk's son was Vrik and his son was Bahuk. King Bahuk's enemies took away all his wealth due to which he adopted the Vanaprastha Ashram and went to the forest with his wife.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥