श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  9.8.17 
एवं वृत्त: परित्यक्त: पित्रा स्‍नेहमपोह्य वै ।
योगैश्वर्येण बालांस्तान् दर्शयित्वा ततो ययौ ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि असमंजस ऐसे घृणित कार्यों में लगा रहता था, उसके पिता ने उससे प्यार करना बंद कर दिया और उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद, असमंजस ने उन लड़कों को पुनर्जीवित करके और उन्हें राजा और उनके माता-पिता को दिखाकर अपनी रहस्यमयी शक्ति का प्रदर्शन किया। इसके बाद असमंजस ने अयोध्या छोड़ दी।
 
Since Asamanjas was involved in such nefarious activities, his father stopped loving him and threw him out of the house. Then Asamanjas demonstrated his yogic powers by bringing those children back to life and showing them to the king and their parents. After that Asamanjas left Ayodhya.
तात्पर्य
असमांजस जाति-स्मरणीय थे; अपनी रहस्यमय शक्तियों के कारण, उन्होंने अपनी पिछली चेतना नहीं भुलाई थी। इस प्रकार वह मृतकों को जीवन दे सकते थे। मृत बच्चों से सम्बन्धित अद्भुत गतिविधियों का प्रदर्शन करके, उन्होंने निश्चित रूप से राजा और आम लोगों का ध्यान आकर्षित किया था। तब उन्होंने तुरंत उस स्थान को छोड़ दिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)