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bhagavat 9.8.12: कभी-कभी निश्चित लोग यह तर्क देते हैं कि राजा सगर के सारे पुत्रों का नाश कपिल मुनि की आँखों से निकली अग्नि के कारण हुआ था परन्तु इस कथन का समर्थन विद्वान व्यक्ति नहीं करते क्योंकि कपिल मुनि का शरीर पूर्णतः सात्विकता का था और इसलिए उनसे क्रोध के रूप में तामसिक गुण नहीं प्रकट हो सकता, उसी प्रकार जैसे स्वच्छ आकाश को धरती की धूल मलीन नहीं कर सकती।   |   bhagavat अध्याय 9.8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  9.8.12 
न साधुवादो मुनिकोपभर्जिता
नृपेन्द्रपुत्रा इति सत्त्वधामनि ।
कथं तमो रोषमयं विभाव्यते
जगत्पवित्रात्मनि खे रजो भुव: ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
कभी-कभी निश्चित लोग यह तर्क देते हैं कि राजा सगर के सारे पुत्रों का नाश कपिल मुनि की आँखों से निकली अग्नि के कारण हुआ था परन्तु इस कथन का समर्थन विद्वान व्यक्ति नहीं करते क्योंकि कपिल मुनि का शरीर पूर्णतः सात्विकता का था और इसलिए उनसे क्रोध के रूप में तामसिक गुण नहीं प्रकट हो सकता, उसी प्रकार जैसे स्वच्छ आकाश को धरती की धूल मलीन नहीं कर सकती।
 
Sometimes it is argued that all the sons of King Sagar were burnt to ashes by the fire that came out of the eyes of Kapil Muni. But learned men do not confirm this view because Kapil Muni's body was completely Satvik and hence Tamoguna in the form of anger cannot manifest from him just as the dust of the earth cannot pollute the clear sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)