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bhagavat 9.4.6: तत्पश्चात, जब नाभाग सम्पत्ति को स्वीकार कर रहा था, तो उत्तर दिशा से एक काला आदमी उसके पास आया और बोला, “इस यज्ञशाला का सारा धन मेरा है।”   |   bhagavat अध्याय 9.4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  9.4.6 
तं कश्चित् स्वीकरिष्यन्तं पुरुष: कृष्णदर्शन: ।
उवाचोत्तरतोऽभ्येत्य ममेदं वास्तुकं वसु ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात, जब नाभाग सम्पत्ति को स्वीकार कर रहा था, तो उत्तर दिशा से एक काला आदमी उसके पास आया और बोला, “इस यज्ञशाला का सारा धन मेरा है।”
 
When Naabhaga was taking all the money, a dark skinned person came to him from the north and said, “All the wealth of this Yagyashala is mine.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)