Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.4.52: डरते हुए दिल के साथ, दुर्वासा मुनि इधर-उधर शरण की तलाश में भटक रहे थे, लेकिन जब उन्हें कोई शरण नहीं मिली, तो अंत में वह भगवान ब्रह्मा के पास गए और कहा- "हे प्रभु, हे ब्रह्माजी, कृपया करके भगवान द्वारा भेजे गए इस जलते हुए सुदर्शन चक्र से मेरी रक्षा करें।" | bhagavat अध्याय 9.4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अलब्धनाथ: स सदा कुतश्चित्
सन्त्रस्तचित्तोऽरणमेषमाण: ।
देवं विरिञ्चं समगाद्विधात-
स्त्राह्यात्मयोनेऽजिततेजसो माम् ॥ ५२ ॥
अनुवाद
डरते हुए दिल के साथ, दुर्वासा मुनि इधर-उधर शरण की तलाश में भटक रहे थे, लेकिन जब उन्हें कोई शरण नहीं मिली, तो अंत में वह भगवान ब्रह्मा के पास गए और कहा- "हे प्रभु, हे ब्रह्माजी, कृपया करके भगवान द्वारा भेजे गए इस जलते हुए सुदर्शन चक्र से मेरी रक्षा करें।"
Sage Durvasa kept looking for shelter here and there with a fearful mind, but when he could not find any shelter, he finally went to Brahmaji and said - O Lord, O Brahmaji, please protect me from this flaming Sudarshan Chakra sent by God.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥