Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 9.4.41: हे कुरुश्रेष्ठ! राजा अम्बरीष ने थोड़ा-सा जल पिया और अपने हृदय में भगवान का ध्यान धर लिया और फिर वे महान योगी दुर्वासा मुनि के वापस आने की प्रतीक्षा करने लगे।   |   bhagavat अध्याय 9.4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 4: दुर्वासा मुनि द्वारा अम्बरीष महाराज का अपमान  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  9.4.41 
इत्यप: प्राश्य राजर्षिश्चिन्तयन् मनसाच्युतम् ।
प्रत्यचष्ट कुरुश्रेष्ठ द्विजागमनमेव स: ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! राजा अम्बरीष ने थोड़ा-सा जल पिया और अपने हृदय में भगवान का ध्यान धर लिया और फिर वे महान योगी दुर्वासा मुनि के वापस आने की प्रतीक्षा करने लगे।
 
O best of the Kurus, after drinking a little water, King Ambarisha meditated upon the Supreme Personality of Godhead in his mind and then he waited for the return of the great yogi Durvasa Muni.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)