सुपार्श्वात् सुमतिस्तस्य पुत्र: सन्नतिमांस्तत: ।
कृती हिरण्यनाभाद् यो योगं प्राप्य जगौ स्म षट् ॥ २८ ॥
संहिता: प्राच्यसाम्नां वै नीपो ह्युद्ग्रायुधस्तत: ।
तस्य क्षेम्य: सुवीरोऽथ सुवीरस्य रिपुञ्जय: ॥ २९ ॥
अनुवाद
सुमति सुपार्श्व के पुत्र थे, सन्नतिमान सुमति के पुत्र थे और सन्नतिमान के पुत्र कृती थे जिन्होंने ब्रह्मा से योग की शक्ति प्राप्त की और सामवेद के प्राच्यसाम नामक श्लोकों की छह संहिताएँ पढ़ाईं। कृती के पुत्र नीप थे, नीप के पुत्र उद्ग्रायुध थे, उद्ग्रायुध के पुत्र क्षेम्य थे, क्षेम्य के पुत्र सुवीर थे और सुवीर के पुत्र रिपुञ्जय थे।
From Suparshva was born a son named Sumati, from Sumati was born Sannatiman and from Sannatiman was Kriti who received Yogashakti from Brahma and taught six Samhitas of the verses of Samveda called Prachyasam. Kriti's son was Neep, Neep's son was Udgrayudh, Udgrayudh's son was Kshemya, Kshemya had a son named Suvir and Suvir's son was Ripunjaya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥