श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 20: पूरु का वंश  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  9.20.28 
मृगाञ्छुक्लदत: कृष्णान् हिरण्येन परीवृतान् ।
अदात् कर्मणि मष्णारे नियुतानि चतुर्दश ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
जब महाराज भरत ने मष्णार नामक यज्ञ सम्पन्न किया (या मष्णार नामक स्थान में यज्ञ किया), तो उन्होंने दान में चौदह लाख उत्कृष्ट हाथी दिए, जिनके दाँत सफेद थे और शरीर काले थे, और जो सुनहरे आभूषणों से ढके हुए थे।
 
When Maharaja Bharata performed the sacrifice called Maṣṇāra (or the sacrifice at a place called Maṣṇāra), he gave in charity fourteen lakhs of the best elephants with white tusks and black bodies covered with golden ornaments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)