माता भस्त्रा पितु: पुत्रो येन जात: स एव स: ।
भरस्व पुत्रं दुष्मन्त मावमंस्था: शकुन्तलाम् ॥ २१ ॥
अनुवाद
आकाशवाणी ने कहा: हे महाराज दुष्मन्त, पुत्र दरअसल अपने पिता का होता है, माता तो बस एक धौंकनी की तरह होती है जो चमड़े की बनी होती है। वैदिक नियमों के अनुसार, पिता ही पुत्र के रूप में जन्म लेता है। इसलिए, अपने पुत्र का पालन-पोषण करो और शकुन्तला का अपमान मत करो।
The voice from the sky said: O King Dushmanta, a son really belongs to his father, while the mother is just a holder like a leather bellows. According to the Vedic injunctions, a father is born as a son. Therefore, you should take care of your son and do not insult Shakuntala.
तात्पर्य
वैदिक अनिवार्यता के अनुसार आत्मा वै पुत्र-नामासि , पिता पुत्र बनता है। माता महज़ एक भंडारणी के समान होती है ,क्योंकि बच्चे का बीज उसके गर्भ में रखा जाता है, परंतु पुत्र के पालन-पोषण का दायित्व पिता का होता है। भगवद् गीता में भगवान कहते हैं कि वह (अहं बीज-प्रद: पिता )सभी जीवों को बीज देने वाला पिता है,इसलिए वह उनके पालन-पोषण का उत्तरदायी है। यह भी वेदों में निश्चित किया गया है। एको बहुनां यो विदधाति कामन्:यद्यपि ईश्वर एक है ,फिर भी वह सभी जीवों को उनके जीवन की आवश्यकताओं से पालता है। विभिन्न रूपों में जीव भगवान के पुत्र हैं,और इसलिए पिता ,ईश्वर , उन्हें उनके अलग-अलग शरीरों के अनुसार भोजन की पूर्ति करता है। छोटी चींटी को एक दाना चीनी मिलता है ,और हाथी को भोजन के टन मिलते हैं ,परंतु हर कोई खाने में सक्षम है। इसलिए जनसंख्या वृद्धि का कोई प्रश्न ही नहीं है। क्योंकि पिता,कृष्ण,पूर्णतया संपन्न हैं, भोजन की कोई कमी नहीं है ,और क्योंकि कोई कमी नहीं है ,जनसंख्या वृद्धि का प्रचार मात्र एक मिथ्या है। वास्तव में, भोजन की कमी के लिए व्यक्ति तब तड़पता है जब पिता के आदेश के अधीन भौतिक प्रकृति उसे भोजन आपूर्ति करने से इंकार कर देती है। जीव की स्थित यह निर्धारित करती है कि भोजन आपूर्ति किया जाएगा या नहीं। जब एक रोगी को खाने से मना कर दिया जाता है, तो इसका यह अर्थ नहीं है कि भोजन की कमी है ;बल्कि ,रोगी को बिना भोजन दिए इलाज की आवश्यकता है। भगवद् गीता (7.10) में भगवान भी कहते हैं, बीजं मामं सर्व भूतानाम :”मैं सभी जीवों का बीज हूँ।” एक विशेष प्रकार का बीज पृथ्वी के अंदर बोया जाता है ,और फिर एक विशेष प्रकार का पेड़ या पौधा निकलता है। माता पृथ्वी के समान है,और जब एक विशेष प्रकार का बीज पिता द्वारा बोया जाता है, तो एक विशेष प्रकार का शरीर जन्म लेता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥