श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 20: पूरु का वंश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  9.20.11 
का त्वं कमलपत्राक्षि कस्यासि हृदयङ्गमे ।
किंस्विच्चिकीर्षितं तत्र भवत्या निर्जने वने ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
हे सुन्दर कमल नयन वाली, तुम कौन हो? तुम किसकी पुत्री हो? इस निर्जन वन में तुम क्या कर रही हो? तुम यहाँ क्यों रह रही हो?
 
O beautiful lotus eyed one, who are you? Whose daughter are you? What is your business in this lonely forest? Why are you staying here?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)