Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.2.35-36: कृशाश्व का पुत्र सोमदत्त हुआ, जिसने अश्वमेध यज्ञ किये जिससे भगवान् विष्णु प्रसन्न हुए। भगवान् की अर्चना करने से उसे ऐसा उच्च पद मिला जो बड़े-बड़े योगियों को मिलता है। सोमदत्त का पुत्र सुमति हुआ जिसका पुत्र जनमेजय हुआ। विशाल वंश में ये सारे राजा हुए, जिन्होंने राजा तृणबिन्दु के विख्यात पद को बनाये रखा। | bhagavat अध्याय 9.2: मनु के पुत्रों की वंशावलियाँ । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृशाश्व का पुत्र सोमदत्त हुआ, जिसने अश्वमेध यज्ञ किये जिससे भगवान् विष्णु प्रसन्न हुए। भगवान् की अर्चना करने से उसे ऐसा उच्च पद मिला जो बड़े-बड़े योगियों को मिलता है। सोमदत्त का पुत्र सुमति हुआ जिसका पुत्र जनमेजय हुआ। विशाल वंश में ये सारे राजा हुए, जिन्होंने राजा तृणबिन्दु के विख्यात पद को बनाये रखा।
Krishasva's son was Somadatta who performed Ashwamedha Yajna and thus pleased Lord Vishnu. By worshipping the Lord he attained such a high position which is attained by great Yogis. Somadatta's son was Sumati whose son was Janamejaya. Appearing in a huge lineage all these kings maintained the famous position of King Trinabindu.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध नौ के अंतर्गत दूसरा अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥